सक्ती, 15 अप्रैल 2026। जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर संयंत्र में अचानक हुए बॉयलर ब्लास्ट में अब तक 16 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही 4 मजदूरों की जान चली गई, जबकि देर शाम तक यह आंकड़ा बढ़कर 12 और बुधवार सुबह तक 16 पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विस्फोट के बाद संयंत्र परिसर में अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार का मंजर देखने को मिला।
घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन घायलों की गंभीर स्थिति ने व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्लांट के बाहर परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा, जिन्होंने प्रबंधन पर सूचना छुपाने और लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। जिला कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, वहीं वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35-35 लाख रुपए मुआवजा और नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों के लिए 15-15 लाख रुपए सहायता राशि तय की गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गई है।
इधर, इस हादसे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने घटना को गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए सवाल उठाया कि क्या यह लापरवाही का नतीजा है? उन्होंने प्लांट में सुरक्षा इंतजामों और आपातकालीन सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। वहीं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इस घटना को ‘हादसा नहीं, बल्कि मजदूरों की हत्या’ करार देते हुए सरकार और प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, हादसे के कारणों की जांच जारी है, लेकिन इस त्रासदी ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।