दिल्ली के इंडिया गेट पर लगे ‘हिड़मा अमर रहे’ के नारे: प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में माओवादी समर्थन से बवाल, 12 छात्रों पर केस

दिल्ली के इंडिया गेट पर लगे ‘हिड़मा अमर रहे’ के नारे: प्रदूषण विरोध प्रदर्शन में माओवादी समर्थन से बवाल, 12 छात्रों पर केस

YC न्यूज़ डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया गेट परिसर में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र अचानक नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा और माओवादियों के समर्थन में नारे लगाने लगे। “हिड़मा अमर रहे” और “जल-जंगल-जमीन की लड़ाई जिंदाबाद” जैसे नारों के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए 12 से ज्यादा छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रदूषण विरोध से माओवादी समर्थन की ओर मुड़ा प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस के अनुसार, पिछले कई दिनों से युवाओं का एक समूह प्रदूषण और जहरीली हवा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था। शनिवार को भी 50 से अधिक छात्र इंडिया गेट के पास जुटे। शुरुआत में प्रदूषण नियंत्रण की मांग और सरकार के खिलाफ नारों के बीच अचानक कुछ छात्र नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के समर्थन में नारे लगाने लगे।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों ने मीडिया से कहा कि “सरकार जनता के हित में काम नहीं कर रही, बल्कि प्रॉफिट मॉडल पर चल रही है। हमें माओवादियों के मॉडल को अपनाने की जरूरत है, जैसा बस्तर और बीजापुर में लागू किया गया है।” छात्रों का यह बयान और नारेबाजी वीडियो में रिकॉर्ड हुई, जो कुछ ही घंटे में वायरल हो गया।
पुलिस पर पेपर स्प्रे, सड़क जाम—30 छात्र हिरासत में
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने इंडिया गेट के पास सड़क को जाम कर दिया था, जिससे ट्रैफिक बाधित हुआ। पुलिस ने जब उन्हें हटाने की कोशिश की तो कुछ छात्रों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल कर दिया। इसकी चपेट में कई पुलिसकर्मी और राहगीर आए।
अधिकारियों ने बताया कि “प्रदर्शन के दौरान संदिग्ध गतिविधियां हुई हैं। माओवादी समर्थन से जुड़े नारों और वीडियो का भी विश्लेषण किया जा रहा है। कई छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।”
हिड़मा का एनकाउंटर और पृष्ठभूमि
नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा को 18 नवंबर को छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। इस ऑपरेशन में उसकी पत्नी सहित सात नक्सली ढेर हुए थे। 35 वर्षों तक सक्रिय रहे हिड़मा ने 300 से अधिक लोगों की हत्या की थी, जिनमें बड़ी संख्या में जवान शामिल थे। वह 2010 में 76 CRPF जवानों की सामूहिक हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था। साथ ही राहत शिविर में 31 आम नागरिकों को जिंदा जलाने की घटना में भी उसका हाथ था।हिड़मा की मौत के बाद बस्तर स्थित उसके गांव में शोक और विरोध देखा गया था। वहीं, पुलिस ने इसे नक्सल गिरोह के लिए ‘सबसे बड़ी चोट’ बताया था।
दिल्ली में उठे सवाल
राजधानी में खुलेआम माओवादी समर्थन के नारे लगने और छात्रों द्वारा हिड़मा की विचारधारा का समर्थन करने को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। दिल्ली पुलिस यह जांच रही है कि क्या इन छात्रों के पीछे किसी संगठित समूह का हाथ है या यह सिर्फ भटकाव में किया गया कदम था।

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