
YC न्यूज डेस्क। कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम् के गायन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर राष्ट्रगीत के गायन को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी वंदे मातरम् रोकने का इशारा नहीं कर रही थीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी लगाने को कह रही थीं। भाजपा ने कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए दावा किया कि वंदे मातरम् के दौरान सोनिया गांधी असहज नजर आईं और उन्होंने गीत रोकने का संकेत दिया। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान परेशान दिखाई दे रहे थे। पार्टी ने पोस्ट में गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन भी उनकी बेचैनी कैमरे में कैद हो गई।
कार्यक्रम के दौरान क्या हुआ
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी झंडे के दाईं ओर, जबकि राहुल गांधी बाईं ओर खड़े दिखाई दिए। वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने पीछे मुड़कर कुछ इशारा किया। इसके बाद राहुल गांधी भी उनकी ओर देखकर कुछ पूछते नजर आए। इसी बीच एक कर्मचारी खड़गे के पास पहुंचा। खड़गे ने उससे बातचीत की और बाद में सोनिया गांधी ने भी कर्मचारी से बात की। वंदे मातरम् का गायन पूरा होने के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण किया।
कांग्रेस ने दी सफाई
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् रोकने की कोई कोशिश नहीं की थी। उनके मुताबिक, मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी कर्मचारी से उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था करने के लिए कह रही थीं। जयराम रमेश ने दावा किया कि कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा गायन हुआ और इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने भाजपा पर वीडियो के एक हिस्से को गलत तरीके से पेश कर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने वंदे मातरम् की परंपरा का किया उल्लेख
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के गायन की परंपरा पुरानी है। उन्होंने 28 अक्टूबर 1937 को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेता मौजूद थे। उनके अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् की शुरुआती पंक्तियों के इस्तेमाल की परंपरा तय की गई थी।
वंदे मातरम् को लेकर पहले भी हो चुका है राजनीतिक विवाद
वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले भी राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में विशेष चर्चा भी हुई थी। भाजपा ने कांग्रेस पर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को हटाने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया था। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रही है। इस पूरे विवाद के बीच स्वतंत्रता दिवस समारोह में सोनिया गांधी के इशारे को लेकर सामने आया वीडियो एक बार फिर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।