बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आज एक बार फिर हलचल मच गई जब प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दिया। बिलासपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा—मैं कभी नहीं कहूंगा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है। मुख्यमंत्री आप नहीं बनना चाहते, ऐसा कौन कहेगा।”
सिंहदेव ने कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद जब कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, तब भी उनका नाम संभावित मुख्यमंत्री के रूप में चर्चा में था। उन्होंने कहा, “उस समय ढाई-ढाई साल के फार्मूले की बातें उठीं, लेकिन मैंने हमेशा पार्टी के निर्णय को सर्वोपरि माना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई निजी महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भावना का हिस्सा है। “राज्य का नेतृत्व करना किसी भी जनसेवक के लिए गौरव की बात होती है,” उन्होंने जोड़ा।
हालांकि, सोनी ने सिंहदेव की सादगी और जनसंपर्क कौशल की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे एक लोकप्रिय और साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं, पर राजनीति में वक्त और हालात सबकुछ बदल देते हैं। सिंहदेव के इस बयान ने छत्तीसगढ़ की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या यह भविष्य की रणनीति का संकेत है या केवल एक स्वाभाविक वक्तव्य।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने कहा—मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना कोई गलत बात नहीं है। यह लोकतंत्र में एक स्वाभाविक आकांक्षा है। फिलहाल पार्टी संगठन सुदृढ़ करने और आगामी चुनाव की तैयारी में जुटी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर निर्णय पार्टी हाईकमान ही तय करते है।
भाजपा का पलटवार:
रायपुर में भाजपा विधायक सुनील सोनी ने तंज कसते हुए कहा—लगता है ढाई-ढाई साल का बुखार अभी उतरा नहीं है। कांग्रेस की सरकार अब नहीं रही, भाजपा की सरकार है। सिंहदेव जी को अब यह बात 15-20 साल तक याद नहीं करनी चाहिए।