छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, OPD सेवा प्रभावित: JDA बोला- बॉन्ड व्यवस्था खत्म हो, मांगें नहीं मानीं तो 28 सितंबर से इमरजेंसी भी बंद

छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, OPD सेवा प्रभावित: JDA बोला- बॉन्ड व्यवस्था खत्म हो, मांगें नहीं मानीं तो 28 सितंबर से इमरजेंसी भी बंद

रायपुर। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने गुरुवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर OPD सेवाओं का बहिष्कार किया। रायपुर के मेडिकल कॉलेज कैंपस में जूनियर डॉक्टर धरने पर बैठे। हड़ताल के चलते अंबेडकर अस्पताल की नियमित OPD सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि मरीजों की परेशानी को देखते हुए JDA ने धरना स्थल पर ही समानांतर OPD शुरू कर दी, जहां डॉक्टरों ने मरीजों की जांच कर उन्हें चिकित्सकीय सलाह और प्रिस्क्रिप्शन दिया। JDA ने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं, बल्कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार और डॉक्टरों से जुड़ी मांगों पर सरकार से ठोस निर्णय कराना है।

सरकार से बातचीत के बाद अब लिखित आदेश की मांग

JDA प्रेसिडेंट डॉ. पीयूष श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत हो चुकी है और स्वास्थ्य मंत्री के साथ भी मांगों को लेकर चर्चा हुई है। अब डॉक्टर केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों के संबंध में लिखित आदेश चाहते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मांग केवल स्टाइपेंड बढ़ाने तक सीमित नहीं है। JDA का कहना है कि प्रदेश में मेडिकल रिफॉर्म्स की जरूरत है, जिससे आने वाले समय में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ सके।

75 लाख रुपए के बॉन्ड पर सवाल

JDA के डॉक्टर रेशम जांगड़े ने बॉन्ड व्यवस्था को आंदोलन की प्रमुख मांग बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। उनके मुताबिक डॉक्टरों के लिए करीब 75 लाख रुपए की बॉन्ड राशि का प्रावधान है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी गरीब परिवार का बच्चा मेरिट के आधार पर MCH जैसे सुपर स्पेशलिटी कोर्स में चयनित होता है, तो उसके परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। JDA का तर्क है कि बॉन्ड अवधि कम होने से डॉक्टरों को विशेषज्ञता हासिल करने के बाद प्रदेश में बेहतर अवसर मिलेंगे और राज्य को भी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध हो सकेंगे।

सुपर स्पेशलिटी सेंटरों में डॉक्टरों की भर्ती की मांग

JDA ने प्रदेश में बनाए जा रहे सुपर स्पेशलिटी सेंटरों में पर्याप्त डॉक्टरों की भर्ती और अलग Super Specialty Cadre बनाने की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बड़ी राशि खर्च की है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त भर्ती और कैडर नहीं होने के कारण इन सुविधाओं का अपेक्षित लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। JDA के मुताबिक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध होने से लिवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधाएं प्रदेश में विकसित की जा सकती हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम हो सकती है।

15,900 रुपए मानदेय का मुद्दा

JDA ने डॉक्टरों के मानदेय को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन का दावा है कि प्रदेश में कई डॉक्टर लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद करीब 15,900 रुपए का भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। JDA ने इंटर्न, रेजिडेंट, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टरों के लिए उनकी जिम्मेदारी एवं कार्य के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय निर्धारित करने की मांग की है।

हड़ताल के बीच धरना स्थल पर मरीजों का इलाज

OPD बहिष्कार के बावजूद JDA ने मरीजों को वापस नहीं लौटाया। डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित धरना स्थल पर ही मरीजों के लिए समानांतर OPD शुरू की। JDA का कहना है कि आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। संगठन के अनुसार मरीज उनकी प्राथमिकता हैं और इसी वजह से हड़ताल के दौरान भी धरना स्थल पर मरीजों की जांच और इलाज की व्यवस्था की गई।

28 सितंबर से इमरजेंसी सेवाएं बंद करने की चेतावनी

JDA ने सरकार को मांगों पर जल्द निर्णय लेने की चेतावनी दी है। संगठन के मुताबिक रायपुर के अलावा बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट, इंटर्न, PG बॉन्डेड, MBBS बॉन्डेड और अन्य डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल हैं। JDA प्रेसिडेंट ने कहा कि यदि मांगों पर जल्द लिखित निर्णय नहीं लिया गया तो 28 सितंबर से आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और इमरजेंसी सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं के बहिष्कार की चेतावनी दी गई है। फिलहाल सरकार और जूनियर डॉक्टरों के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अब नजर इस बात पर है कि 28 सितंबर से पहले सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।

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