भिलाई। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बावजूद दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड के सरकारी स्कूलों ने शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल पेश की है। सुनियोजित तैयारी, अतिरिक्त कक्षाओं और मॉक टेस्ट के जरिए इस वर्ष जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए लगभग 250 बच्चों का चयन हुआ है। जवाहर नवोदय विद्यालय, बोरई की 80 सीटों में से 48 सीटों पर धमधा ब्लॉक के बच्चों का चयन हुआ, जो पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। इनमें शासकीय माध्यमिक शाला डोड़की से 18 और शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया से 14 विद्यार्थियों का चयन शामिल है। इस सफलता के पीछे शिक्षकों की विशेष रणनीति रही। विकासखंड के 186 स्कूलों को अलग-अलग जोन में विभाजित कर शिक्षकों को नवोदय परीक्षा पैटर्न के अनुसार प्रशिक्षित किया गया, ताकि सभी स्कूलों में एक समान तैयारी सुनिश्चित हो सके। शासकीय माध्यमिक शाला डोड़की के प्रधानपाठक यशवंत कुमार पटेल, सहायक शिक्षक खिलेश्वर साहू और सेमरिया स्कूल के प्रधानपाठक दिनेश वर्मा ने इस अभियान का समन्वय किया।
अतिरिक्त कक्षाएं और मॉक टेस्ट बने सफलता की कुंजी–
बच्चों को नियमित पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल शुरू होने से पहले और छुट्टी के बाद विशेष कक्षाएं दी गईं। इनमें गणित, हिंदी और मानसिक योग्यता के प्रश्नों का लगातार अभ्यास कराया गया। मॉक टेस्ट, मॉडल पेपर और पुराने प्रश्नपत्र हल कराकर बच्चों की तैयारी को मजबूत किया गया। प्रदर्शन के आधार पर समूह बनाकर कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया।
साधारण परिवारों के बच्चों ने रचा इतिहास
चयनित अधिकांश विद्यार्थी किसान और मजदूर परिवारों से हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। धमधा विकासखंड के बीईओ अथर्व शर्मा ने कहा कि अब यह धारणा बदल रही है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं में पीछे रहते हैं। वहीं डीईओ दुर्ग अरविंद मिश्रा ने इसे शिक्षकों की मेहनत, योजना और टीमवर्क का परिणाम बताया। धमधा का यह मॉडल अब प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि गांवों में प्रतिभा की कमी नहीं, जरूरत है सही दिशा और अवसर की।