
YC न्यूज़ डेस्क । देशभर के लाखों शिक्षकों से जुड़े टीईटी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई ने बड़ा संदेश दे दिया है। अदालत ने साफ कहा कि बिना पात्रता परीक्षा यानी TET पास किए किसी भी व्यक्ति को शिक्षक बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद उन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, जिनकी नियुक्ति TET लागू होने से पहले हुई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पात्रता परीक्षा में जितनी छूट दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है। अब नियमों में और ढील देने की संभावना बेहद कम है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के नियमों का पालन सभी राज्यों और शिक्षकों को करना होगा।
दरअसल, मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति 1998 से 2009 के बीच बिना TET परीक्षा के हुई थी। कई राज्यों में शिक्षा संगठनों और शिक्षक संघों ने मांग की थी कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को परीक्षा से छूट दी जाए। इसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 70 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को दिए अपने आदेश में पहले ही साफ कर दिया था कि बिना TET नियुक्त शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य होगी। जानकारी के मुताबिक अकेले मध्य प्रदेश में ही करीब डेढ़ लाख ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति बिना TET के हुई थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उचित नहीं होगा। उन्होंने अनुभव को भी अहम आधार बताया। हालांकि अदालत ने कहा कि वर्ष 2017 में नियम लागू होने के बाद पांच साल की छूट पहले ही दी जा चुकी थी, ताकि शिक्षक परीक्षा पास कर सकें।
सुनवाई के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता और नियमबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। फिलहाल मामले में अंतिम फैसला अभी नहीं आया है और आगे भी सुनवाई जारी रहेगी। अब देशभर के लाखों शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।