
रायपुर । सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षकों की कमी को गंभीर मुद्दा मानते हुए राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। विशेष शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने सरकार को दो महीने के भीतर जरूरी कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया है। साथ ही जुलाई 2026 में अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को भी कहा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि प्रदेश में 49 हजार से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि दिव्यांग और विशेष बच्चों की शिक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
अदालत को बताया गया कि राज्य में समावेशी शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 3981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है, जबकि अब तक केवल 848 पद ही स्वीकृत किए गए हैं। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक अधिकार है और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को उचित शैक्षणिक सहयोग मिलना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (BRP) और 85 विशेष शिक्षकों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया जल्द पूरी कर नियुक्ति पर फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पात्र अभ्यर्थियों की भर्ती में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि भर्ती प्रक्रिया और उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट जुलाई 2026 में पेश की जाए। अदालत ने संकेत दिए कि यदि तय समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार को जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। विशेष शिक्षकों की कमी को लेकर लंबे समय से शिक्षा संगठनों और अभिभावकों द्वारा चिंता जताई जाती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति से न केवल विशेष बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।