अंबिकापुर, 17 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक निजी स्कूल पर भाषा के आधार पर भेदभाव का गंभीर आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि 4 वर्षीय मासूम बच्चे को केवल इसलिए एडमिशन देने से मना कर दिया गया क्योंकि वह सरगुजिया बोली में बात करता था। मामला अंबिकापुर स्थित सौरंग किड्स एकेडमी का है। अभिभावकों के अनुसार, बच्चे को एक सप्ताह तक डेमो क्लास में रखा गया, जहां उसने स्वाभाविक रूप से अपनी मातृभाषा सरगुजिया में संवाद किया। लेकिन बाद में स्कूल प्रबंधन ने यह कहकर एडमिशन देने से इनकार कर दिया कि बच्चे की भाषा अन्य बच्चों को प्रभावित कर सकती है।
इस फैसले से आहत परिजनों ने इसे सीधा-सीधा भेदभाव करार दिया है। उनका कहना है कि मातृभाषा किसी भी बच्चे की पहचान का अहम हिस्सा होती है और इसी आधार पर उसे शिक्षा से वंचित करना न केवल गलत बल्कि असंवैधानिक भी है। मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी देखी जा रही है। वहीं, शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। सहायक संचालक ने स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल प्रबंधन दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
• शिक्षा मंत्री का सख्त रुख
इस पूरे मामले पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं और संबंधित स्कूल को नोटिस जारी करने को कहा है। मंत्री ने साफ कहा कि भाषा के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव “पूरी तरह अस्वीकार्य” है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार हल्बी, गोंडी और सरगुजिया जैसी स्थानीय बोलियों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं शिक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ हैं और इन्हें किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।