दुर्ग। केंद्र सरकार की महती आकांक्षा आजादी का अमृत महोत्सव अभियान के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े लोगों, घटनाओं और स्थानों की कहानियों के दस्तावेजीकरण का उत्तरदायित्व छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को सौंपा गया था। नई दिल्ली स्थित CCRT में प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत दुर्ग जिले सहित प्रदेश के अनेक शिक्षकों ने इस दायित्व का निर्वहन किया।
शिक्षक टिकेश्वर प्रसाद गजपाल (शा. प्रा. शाला आगेसरा), राघवेन्द्र कुमार ध्रुव (शा. प्रा. शाला उमरपोटी), एमन सिंह साहू, कृष्ण कुमार साहू और यादराम साहू ने बालोद, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, बेमेतरा आदि जिलों का दौरा कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों से संपर्क किया। उन्होंने सेनानियों के जीवन संघर्ष, जेल प्रमाण पत्र, पेंशन पत्र, ताम्रपत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एकत्र कर उन्हें लिपिबद्ध किया । इन शिक्षकों ने न सिर्फ भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाओं को दस्तावेजी स्वरूप में संरक्षित किया है, बल्कि उनकी स्मृतियों को समाज के सामने जीवंत कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि जिन परिवारों से वे मिले, उनके वंशज आज भी अपने पूर्वजों के योगदान पर गर्व महसूस करते हैं। छत्तीसगढ़ के इन शिक्षकों की मेहनत आजादी के उन नायकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया।
“उमरगांव बना ‘स्वतंत्रता सेनानियों का ग्राम’,
इस अभियान के दौरान शिक्षकों ने धमतरी जिले के नगरी-सिहावा वनांचल क्षेत्र स्थित उमरगांव का भी भ्रमण किया। यह गांव विशेष है क्योंकि यहां से 45 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी की लड़ाई में शामिल हुए थे। इसी कारण इसे “स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का ग्राम” कहा जाता है।
डिजिटल रूप में उपलब्ध आजादी की गाथाएं”
शिक्षकों के अथक प्रयासों से वर्ष 2023 से अब तक 400 से अधिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानियां संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी हैं। मंत्रालय द्वारा गहन अध्ययन के बाद इन कहानियों को आधिकारिक पोर्टल https://amritkaal.nic.in पर अपलोड किया गया है। यहां से कोई भी नागरिक इन महान सेनानियों के योगदान की जानकारी प्राप्त कर सकता है।