रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यशाला में संसदीय रिपोर्टिंग के महत्व, मर्यादा और संवैधानिक दायरे को लेकर गहन चर्चा हुई। कार्यशाला के समापन सत्र में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी राज्य विधानसभा को संविधानिक दृष्टि से संसद के पारित कानून के विरुद्ध प्रस्ताव पारित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) का उदाहरण देते हुए कहा कि नागरिकता केंद्र सरकार का विषय है, राज्य का नहीं। इस पर कुछ राज्य विधानसभाओं ने विरोध में प्रस्ताव पारित किए, जो संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं था। डॉ. त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि ऐसी संवेदनशील विषयों पर रिपोर्टिंग करते समय पत्रकारों को तथ्यपरक और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आईआईएमसी के पूर्व निदेशक डॉ. संजय द्विवेदी ने संसदीय पत्रकारिता को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि आज की रिपोर्टिंग में सकारात्मक संवाद को पीछे छोड़ नकारात्मकता को प्राथमिकता दी जा रही है, जो पश्चिमी मीडिया की देन है। उन्होंने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे बहस, संवाद और सार्थक विमर्श को प्रमुखता दें।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने संसदीय रिपोर्टिंग को विशेष ज्ञान और अनुशासन से जुड़ा क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि रिपोर्टरों को संसदीय शब्दावली, प्रक्रिया और नियमों की अच्छी समझ होनी चाहिए। सभा की कार्यवाही को भावनाओं या अटकलों के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्य और मर्यादा के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि संसदीय रिपोर्टिंग में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि जनता यह जान सके कि उनके प्रतिनिधि विधानसभा में किस तरह जवाबदेही निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को पत्रकारों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि विधानसभा की गतिविधियां अब और प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचेंगी। उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से लोग जान पाते हैं कि उनकी समस्याओं को सदन में कितनी गंभीरता से उठाया जा रहा है।