केरल में ‘द केरल स्टोरी’ और धर्मान्तरण बना चुनावी मुद्दा, सियासी दलों में तीखी बयानबाजी

YC न्यूज़ डेस्क । केरल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में अंतरधार्मिक विवाह, धर्म परिवर्तन और फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी की मुस्लिम युवक से शादी का मामला भी चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है, जिस पर विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक बयान ने भी चर्चा को हवा दी। इडुक्की में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘द केरल स्टोरी-2’ को लेकर कहा कि “अच्छी बात है कि थिएटर खाली हैं और लोग इसे नहीं देख रहे।” इससे फिल्म और उससे जुड़े नैरेटिव पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

विवादित फिल्म The Kerala Story, जिसमें प्रेम जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने का कथानक दिखाया गया है, पहले भी विवादों में रही है। राज्य सरकार ने इसे “प्रोपेगेंडा” बताते हुए रोकने की कोशिश की थी, जबकि अदालत के हस्तक्षेप के बाद इसे रिलीज की अनुमति मिली थी। हालांकि कई सिनेमा हॉल में इसे नहीं दिखाया गया। राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर और मध्य केरल के छह जिलों—कासरगोड, कोझिकोड, त्रिशूर, मलप्पुरम, कन्नूर और पलक्कड़—में धर्म परिवर्तन के मुद्दे की चर्चा अधिक है। इन जिलों में लगभग 70 सीटें आती हैं, जो चुनावी दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही हैं।

भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री की बेटी टी. वीना और पी. ए. मोहम्मद रियास के विवाह का जिक्र कर रही है। वहीं सत्तारूढ़ Communist Party of India (Marxist) (CPM) ने इसे निजी मामला बताते हुए विपक्ष पर “अनावश्यक राजनीतिकरण” का आरोप लगाया है। इसी बीच “मोनालिसा-फरमान” विवाह का मामला भी चर्चा में है, जिसे CPM नेताओं ने “वास्तविक केरल की कहानी” बताते हुए साझा किया। पार्टी का कहना है कि अंतरधार्मिक विवाह को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है।

दूसरी ओर, कुछ हिंदू और ईसाई संगठनों का दावा है कि राज्य में प्रेम संबंधों के जरिए धर्म परिवर्तन के मामले सामने आ रहे हैं। कुछ संगठनों ने पिछले एक दशक में हजारों लड़कियों के धर्म परिवर्तन का दावा किया है, हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चर्च से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसे मामलों को लेकर समुदाय में चिंता है और इसके लिए हेल्पलाइन भी शुरू की गई है। वहीं मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रेम विवाह को “लव जिहाद” बताना गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चर्चा में जरूर है, लेकिन इसका चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, यह स्पष्ट नहीं है। कई स्थानीय मतदाता इसे व्यक्तिगत और सामाजिक मामला मानते हुए चुनाव में विकास और स्थानीय मुद्दों को अधिक अहम बता रहे हैं।

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