पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई और झाड़ूराम देवांगन की विरासत अब रहेगी सुरक्षित- मीनाबाई साहू और चेतन लाल देवांगन ने रचा इतिहास, पंडवानी के सभी 18 पर्वों का पहली बार हुआ संपूर्ण डिजिटल दस्तावेजीकरण

पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई और झाड़ूराम देवांगन की विरासत अब रहेगी सुरक्षित- मीनाबाई साहू और चेतन लाल देवांगन ने रचा इतिहास, पंडवानी के सभी 18 पर्वों का पहली बार हुआ संपूर्ण डिजिटल दस्तावेजीकरण

रायपुर/भोपाल। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और पंडवानी परंपरा के इतिहास में आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। पहली बार महाभारत के सभी 18 पर्वों का वेदमती एवं कापालिक शैली में संपूर्ण ऑडियो-वीडियो दस्तावेजीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। यह ऐतिहासिक कार्य जनजाति संग्रहालय भोपाल तथा जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृत परिषद के सौजन्य से संपन्न हुआ।

इस अनूठे दस्तावेजीकरण में पंडवानी विद्वान चेतन लाल देवांगन एवं विदूषी मीनाबाई साहू ने अपने प्रभावशाली अभिनय और सुमधुर प्रस्तुति से महाभारत की कथा को जीवंत किया। वहीं चेतराम साहू, कपिलनाथ साहू, महेश वर्मा, रमाकांत सिंगोर, भूपेंद्र देवांगन, महेंद्र निर्मलकर, नरेंद्र साहू, राधेश्याम लाल साहू, गोपी गोस्वामी, रवि कुमार साहू और धन्नूलाल सिन्हा सहित अन्य कलाकारों ने उत्कृष्ट संगत देकर प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बनाया। यह दस्तावेजीकरण केवल एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई तथा पंडवानी के पितृपुरुष झाड़ूराम देवांगन की विरासत डिजिटल स्वरूप में आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो जाएगी। यह संग्रह शोधकर्ताओं, लोककला प्रेमियों और संस्कृति के अध्येताओं के लिए एक अनमोल धरोहर सिद्ध होगा।

लोक संस्कृति से जुड़े लोगों ने कहा कि जिस छत्तीसगढ़ी बोली को कभी केवल ग्रामीण भाषा माना जाता था, वही आज विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है। पद्मभूषण डॉ. हबीब तनवीर और पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई जैसे महान कलाकारों ने इसे वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस ऐतिहासिक अभियान से जुड़े सभी कलाकारों, संस्थाओं और सहयोगियों ने इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर बताते हुए इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य उपहार बताया।

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