अंधविश्वास का कहर : झोलाछाप इलाज और जबरन धर्म परिवर्तन के बीच मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती की मौत, महिला गिरफ्तार

राजिम, गरियाबंद | छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र में अंधविश्वास, झोलाछाप इलाज और कथित धर्मांतरण के बीच एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती की दर्दनाक मौत हो गई। मृतका की मां ने एक महिला पर तीन महीने तक बंधक बनाकर झूठे चमत्कारी इलाज के नाम पर अत्याचार करने और बेटी की जान लेने का आरोप लगाया है।

मृतका 22 वर्षीय योगिता सोनवानी मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और रायपुर के निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। आर्थिक तंगी के चलते उसकी मां सुनीता सोनवानी ने महासमुंद के सुरसाबांधा में कथित आयुर्वेदिक इलाज की जानकारी मिलने पर उसे वहां ले गई। वहां ईश्वरी साहू नामक महिला ने चंगाई सभा और प्रार्थनाओं के जरिए शैतान भगाने की बात कहकर इलाज शुरू किया।

“सीने पर चढ़कर इलाज, पसली टूटने से गई जान”
परिजनों के मुताबिक, ईश्वरी ने योगिता को अपने घर में तीन महीने तक बंधक बनाए रखा। इलाज के नाम पर गरम पानी, तेल और अपने पैरों से शरीर पर अत्याचार करती रही। एक दिन उसके सीने पर चढ़कर “चमत्कारी इलाज” करने के दौरान योगिता की पसली टूट गई, जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पसली टूटने और अत्यधिक दबाव के कारण मौत की पुष्टि हुई है।

जबरन धर्म परिवर्तन का भी आरोप
मृतका की मां ने आरोप लगाया है कि आरोपी महिला ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव डाल रही थी और बाइबल पढ़ने, प्रार्थना करने के नाम पर मानसिक उत्पीड़न कर रही थी। गांव में पहले से ‘चंगाई सभा’ के नाम पर ऐसे आयोजन होते रहे हैं, जहां ईश्वर की प्रार्थना के ज़रिए बीमारियों को ठीक करने का दावा किया जाता है।

एफआईआर दर्ज, महिला गिरफ्तार
राजिम पुलिस ने सुनीता सोनवानी की शिकायत पर ईश्वरी साहू के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2006 की धारा 4 और औषधि एवं चमत्कारिक उपचार अधिनियम 1954 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

“दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा” – एएसपी चंद्राकर
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र चंद्राकर ने कहा, “अंधविश्वास, झोलाछाप इलाज और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच प्राथमिकता से की जा रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।”

इस घटना ने समाज में फैले अंधविश्वास और अवैज्ञानिक उपचार पद्धतियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस प्रकार की ‘चंगाई सभाओं’ पर कड़ी निगरानी रखी जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।

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