दुर्ग । ग्राम ओटेबंद बगिचा में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ के अंतर्गत चल रही श्रीमद् भागवत पुराण कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। कथा वाचन के दौरान संत राजीव नयन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक वर्णन किया। संत राजीव नयन महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण का नाम स्वयं में एक मंत्र है और भगवद्गीता जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि भगवान खट्टे-मीठे भोग के नहीं, बल्कि प्रेम के भूखे होते हैं। जो संपूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं, वे भक्तों के निष्कपट प्रेम और सच्चे भाव से ही प्रसन्न होते हैं। प्रभु को पाने के लिए गोपियों जैसी व्याकुल भक्ति, समर्पण और आंतरिक शुद्धता आवश्यक है।
कथा के दौरान संत ने गुरु की महिमा का भी वर्णन करते हुए कहा कि बिना गुरु के नाम, पद, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है। बाह्य शिक्षा तो हर कोई प्राप्त कर लेता है, लेकिन यदि वह ज्ञान भक्ति में परिवर्तित नहीं होता तो वही अहंकार का कारण बन जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए कंस के अत्याचार, कारागार में देवकी और वासुदेव की पीड़ा तथा मध्यरात्रि में अवतरित हुए भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का जीवंत चित्रण किया। कथा सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्ति भाव से गूंज उठा।