रायपुर। “भारतीय दर्शन हमें सिखाता है कि हम केवल शरीर नहीं, आत्मस्वरूप हैं। सूचना और ज्ञान बाहर से आते हैं, लेकिन विज़न और जीवन की दिशा भीतर से आती है। आज यही ‘भीतर’ हमसे छूट रहा है।” – यह बात भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर के डायरेक्टर प्रो. रामकुमार काकानी ने पत्रिका समूह द्वारा 20 अप्रैल को रायपुर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही। उन्होंने आधुनिक शिक्षा की सीमाओं और पारिवारिक-सांस्कृतिक विघटन पर गहरी चिंता जताई।
प्रो. काकानी ने कहा कि आज की पीढ़ी चौबीसों घंटे विज्ञापनों के असर, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी दबाव से घिरी है। “पारिवारिक ढांचे में आए बदलावों और संवाद की कमी ने पीढ़ियों के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ा दी है। साझा मूल्यों की पुनः पहचान और संवाद की संस्कृति को लौटाना समय की ज़रूरत है।”
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा, “हमारा देश केवल तकनीकी या आर्थिक तरक्की से महान नहीं बनेगा, बल्कि हमारी संस्कृति, मूल्य और पारिवारिक ताना-बाना ही हमारी असली पहचान हैं। युवा पीढ़ी को केवल कौशल नहीं, संस्कार और संवेदना भी दी जानी चाहिए।” उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ “संस्कारों की शिक्षा” पर ज़ोर दिया।
कोंडागांव की युवा उद्यमी सुश्री अपूर्वा त्रिपाठी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने पारंपरिक शिल्प को नवाचार से जोड़ा और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ा। उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े बिना स्थायी विकास संभव नहीं है।”
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी ने कहा, “आज ज्ञान का विस्फोट है, लेकिन भीतर की शांति और दिशा का अभाव है। जब तक हम आत्मस्वरूप की पहचान नहीं करेंगे, तब तक हमारी शिक्षित पीढ़ी केवल उपयोगकर्ता बनकर रह जाएगी, निर्माता नहीं।”
कार्यक्रम में विधायक श्री सुनील सोनी, श्री पुरंदर मिश्रा, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पद्मश्री श्रीमती फुलबासन यादव, पत्रिका स्टेट एडिटर श्री पंकज श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।