छत्तीसगढ़ में 21 साल बाद होगा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, लाखों नाम कटने की आशंका

छत्तीसगढ़ में 21 साल बाद होगा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, लाखों नाम कटने की आशंका

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 21 साल बाद मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) होने जा रहा है। बिहार की तर्ज पर हो रहे इस अभियान के लिए राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार को हुई ऑनलाइन बैठक में मतदान केंद्रों के युक्तियुक्तकरण, 2003 से 2025 तक की मतदाता सूचियों का मिलान, रिक्त पदों की पूर्ति और स्टाफ की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

प्रदेश में इससे पहले 2004 में एसआईआर हुआ था, जब विधानसभा सीटों का परिसीमन हुआ था। तब बड़ी संख्या में मृत और फर्जी वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे। जानकारों का अनुमान है कि इस बार भी लाखों नाम कट सकते हैं।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि गड़बड़ियों के लिए राजनीतिक दल भी जिम्मेदार हैं। वे समय पर सूची की प्रति लेने नहीं आते और सर्वे के दौरान सहयोग नहीं करते। जबकि वोटर पर्ची वितरण के समय गड़बड़ी पकड़ना आसान है।

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत किसी भी मतदाता का नाम दो जगह दर्ज नहीं होना चाहिए और न्यूनतम आयु 18 वर्ष अनिवार्य है। गलत दस्तावेज से नाम जुड़वाने पर एक साल की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, अधिकारी की गलती पर तीन माह से दो साल तक की सजा हो सकती है। पूर्व परिसीमन आयोग सदस्य डॉ. सुशील त्रिवेदी ने कहा कि 2026 की जनगणना के बाद परिसीमन और पुनरीक्षण दोनों होंगे। यह प्रक्रिया पारदर्शी चुनावी व्यवस्था की दिशा में अहम कदम होगी।

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