आज से तीन दिवसीय हड़ताल: दफ्तरों में लटकेंगे ताले, स्कूलों में पढ़ाई ठप, अस्पतालों की सेवाएं भी प्रभावित—5 लाख से अधिक कर्मचारी-अधिकारी आंदोलन पर

33 जिला मुख्यालयों में एक साथ प्रदर्शन, महंगाई भत्ता और वेतन विसंगतियां बनीं हड़ताल की बड़ी वजह

रायपुर | 29 दिसंबर 2025 छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और अधिकारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर सोमवार से बड़ा आंदोलन शुरू हो गया है। प्रदेश के 5 लाख से अधिक कर्मचारी-अधिकारी 29 दिसंबर से तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं। इस व्यापक आंदोलन के चलते प्रदेश के लगभग सभी शासकीय विभागों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। इस हड़ताल में संविदा कर्मचारी, मध्याह्न भोजन कर्मचारी, स्कूल सफाई कर्मचारी, पटवारी, शिक्षक, पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), तहसीलदार, डिप्टी कलेक्टर, राजस्व अधिकारी, क्लर्क, लेखापाल सहित लगभग पूरा प्रशासनिक ढांचा शामिल है।
33 जिला मुख्यालयों में एक साथ आंदोलन
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि यह आंदोलन 29, 30 और 31 दिसंबर को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में एक साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहेगा। फेडरेशन ने सभी कर्मचारियों-अधिकारियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद करने की अपील की है।
महंगाई भत्ता और एरियर्स बना मुख्य मुद्दा
फेडरेशन के अनुसार, केंद्र सरकार के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता (डीए) और उसके लंबित एरियर्स की राशि अब तक राज्य सरकार द्वारा नहीं दी गई है। बढ़ती महंगाई के दौर में डीए और एरियर्स की अदायगी न होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
शिक्षकों की मांगों को लेकर भी असंतोष
प्रदेश के लगभग दो लाख एलबी संवर्ग शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना का लाभ नहीं मिलने को लेकर भी आक्रोश है। शिक्षकों का कहना है कि इससे उन्हें पदोन्नति, वेतन और पेंशन से जुड़े अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है। इसके साथ ही सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगतियों का निराकरण भी आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है।
बेहतर सेवा शर्तों की भी मांग
कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने बेहतर सेवा शर्तें, सेवा नियमों में सुधार, पदोन्नति में पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय जैसे मुद्दों को भी आंदोलन का आधार बताया है। संगठन का कहना है कि कई बार ज्ञापन और आश्वासन के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारी हड़ताल के लिए मजबूर हुए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ेगा असर
हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता दिख रहा है। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में 29, 30 और 31 दिसंबर को निश्चितकालीन आंदोलन के लिए आवेदन कर दिया है। इससे अस्पतालों की नियमित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के आंदोलन के बाद भी शासन ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा, जिससे सरकारी कामकाज के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह ठप हो सकती हैं।

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