
जगदलपुर। बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच शुक्रवार को एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिलेगा। तिरंगा यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया जाएगा, जिसे कभी नक्सलियों के ‘ब्लैक फॉरेस्ट’ और माओवादी कोर जोन के रूप में जाना जाता था। यात्रा का अंतिम चरण बीजापुर से शुरू होकर आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा तक पहुंचेगा। इसी के साथ तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा का समापन होगा।
तीन राज्यों को जोड़ती है कर्रेगुट्टा पहाड़ी
कर्रेगुट्टा पहाड़ी छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा से जुड़ा रणनीतिक इलाका माना जाता है। लंबे समय तक यह क्षेत्र माओवादी संगठन के शीर्ष कैडरों हिड़मा, देवा, दामोदर और आजाद का सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इसी इलाके में नक्सलियों की हथियार निर्माण इकाइयां सक्रिय थीं और यहीं से संगठन की कई सैन्य गतिविधियां संचालित होती थीं।
सबसे बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन के बाद बदली तस्वीर
करीब एक वर्ष पहले सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में देश के सबसे बड़े एंटी-नक्सल अभियानों में से एक चलाया था। अभियान के दौरान 31 नक्सली मारे गए थे और बड़ी मात्रा में हथियार तथा विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। अधिकारियों के अनुसार कर्रेगुट्टा क्षेत्र में नक्सलियों ने हजारों आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बिछा रखे थे। व्यापक सर्च ऑपरेशन और सुरक्षा कार्रवाई के बाद अब यह पहाड़ी पूरी तरह सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है।
पहली बार कर्रेगुट्टा तक तिरंगा यात्रा
सुरक्षा बलों के नियंत्रण के बाद पहली बार कर्रेगुट्टा पहाड़ी तक सार्वजनिक तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। इसे बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होने और सामान्य जनजीवन की वापसी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, छात्र-छात्राएं और सुरक्षा बलों के जवान शामिल हैं।
स्कूली बच्चों और ग्रामीणों में उत्साह
यात्रा मार्ग में कई स्थानों पर स्कूली बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर सड़क किनारे खड़े दिखाई दिए। ग्रामीणों ने भी यात्रा का स्वागत किया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने यात्रा के दौरान शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मान दिया और सुरक्षा बलों के जवानों का हौसला बढ़ाया।
बीजापुर पहुंचा तीसरे दिन का काफिला
तिरंगा यात्रा शुक्रवार सुबह बीजापुर पहुंची, जहां से अंतिम चरण की शुरुआत हुई। इसके बाद काफिला आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा की ओर रवाना हुआ। कुर्रेगुट्टा को यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि जिस पहाड़ी की पहचान कभी नक्सली प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में होती थी, उसी स्थान पर अब राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
दूसरे दिन नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरी यात्रा
यात्रा का दूसरा चरण दंतेवाड़ा से शुरू होकर कुआकोंडा, भूसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम से होकर बीजापुर पहुंचा था। ये सभी इलाके लंबे समय तक नक्सल हिंसा, बड़े हमलों और सुरक्षा अभियानों के कारण देशभर में चर्चा में रहे हैं। इन क्षेत्रों में अनेक सुरक्षा जवानों ने शहादत दी है।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
कभी नक्सल प्रभाव वाले इन दुर्गम इलाकों से अब तिरंगा यात्रा का गुजरना बस्तर में बदलते सुरक्षा और सामाजिक माहौल की नई तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां पहले भय और बंदूक का माहौल था, वहां अब तिरंगा और विकास की चर्चा हो रही है। कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराने का कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर में लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के प्रतीकात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।