
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लॉकडाउन के दौरान कथित रूप से अवैध शराब परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रक CG04-MC-2593 को जब्त कर लिया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह ट्रक कारोबारी मित्तल के नाम से संचालित उद्योग में पंजीकृत है और इसका उपयोग एमवी डिस्टलरीज से शराब होटल और बार तक पहुंचाने के लिए किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई शराब घोटाले से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई। EOW-ACB का आरोप है कि पूरे नेटवर्क का संचालन कारोबारी अनवर ढेबर के निर्देश पर किया गया था।
लॉकडाउन में 8400 पेटी शराब की सप्लाई का दावा
EOW-ACB के अधिकारियों के मुताबिक मार्च और अप्रैल 2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान एमवी डिस्टलरीज से करीब 8,400 पेटी शराब का अवैध परिवहन और विक्रय किया गया। पूछताछ और दस्तावेजी जांच में यह ट्रक उस परिवहन श्रृंखला का हिस्सा पाया गया, जिसके माध्यम से शराब अलग-अलग बार और होटलों तक पहुंचाई गई। एजेंसी ने बताया कि 1 अगस्त 2026 को ट्रक को जब्त कर लिया गया और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
अब तक 24 वाहन जब्त
जांच में यह भी सामने आया है कि लॉकडाउन अवधि में कथित तौर पर निम्न गुणवत्ता की शराब का निर्माण किया गया था। बाद में उसे पीने योग्य नहीं बताते हुए नष्ट कर दिया गया। अधिकारियों को अन्य वाहनों के इस्तेमाल की भी जानकारी मिली है। इनमें से कई वाहन बेचे जा चुके हैं या दूसरे उपयोग में लाए जा रहे हैं। EOW-ACB ने बताया कि इस मामले में अब तक 24 वाहनों की जब्ती की जा चुकी है, जबकि अन्य वाहनों के स्वामित्व और उपयोग की अलग से जांच की जा रही है।
भिलाई में ऑडिट फर्म पर भी छापा
शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में EOW-ACB ने सीएसएमसीएल की ओर से नियुक्त नोडल ऑडिट फर्म पीएसएसी एंड एसोसिएट्स के भिलाई स्थित मोतीलाल नेहरू नगर (पूर्व) कार्यालय में भी सर्च ऑपरेशन चलाया। कार्रवाई के दौरान ऑडिट से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि ऑडिट प्रक्रिया के दौरान कई शराब दुकानों की जांच नहीं होने दी गई, जिससे कथित अवैध शराब बिक्री नेटवर्क प्रभावित न हो। जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में शामिल है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। ED की शिकायत पर ACB में दर्ज एफआईआर में 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है। ED ने अपनी जांच में आरोप लगाया है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए शराब कारोबार में अवैध वसूली और अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।
फरवरी 2019 की बैठक जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों के अनुसार फरवरी 2019 में रायपुर के जेल रोड स्थित एक होटल में प्रदेश के प्रमुख डिस्टलरी संचालकों की बैठक हुई थी। इसमें विभिन्न डिस्टलरी और शराब कारोबार से जुड़े लोगों की मौजूदगी बताई गई है। एजेंसियां इस बैठक को कथित सिंडिकेट गठन से जोड़कर जांच कर रही हैं। EOW-ACB का कहना है कि मामले में आगे भी तलाशी, दस्तावेजी जांच और वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी। शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, परिवहन नेटवर्क और ऑडिट प्रक्रिया की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है।