रायपुर। छत्तीसगढ़ में न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर चल रहे रसोइयों के आंदोलन के बीच दो महिला रसोइयों की मौत हो गई, जिससे धरना स्थल पर आक्रोश फैल गया है। रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले 30 दिनों से जारी प्रदर्शन के दौरान दोनों महिलाओं की तबीयत बिगड़ी थी। इलाज के दौरान दुर्ग और बालोद में उनकी मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, बेमेतरा जिले के सालधा गांव निवासी दुलारी यादव और बालोद जिले के कुसुमकासा गांव की रहने वाली रुकमणि सिन्हा की जान गई है। दोनों महिलाएं छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले चल रहे आंदोलन में शामिल थीं।
इलाज के दौरान तोड़ा दम–
बताया गया कि 25 जनवरी को आंदोलन के दौरान दुलारी यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल (मेकाहारा) में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें भिलाई स्थित एक निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, दुलारी यादव पहले से हृदय रोग से पीड़ित थीं। डॉक्टरों ने प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण मेटाबोलिक एसिडोसिस बताया है।
वहीं, बालोद जिले के कुसुमकासा की रहने वाली रुकमणि सिन्हा 20 से 23 जनवरी तक आंदोलन में शामिल रहीं। रायपुर से लौटने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। 24 जनवरी को उन्हें 108 एम्बुलेंस से बालोद जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। 26 जनवरी की दोपहर इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
86 हजार रसोइया आंदोलनरत–
प्रदेशभर में करीब 86 हजार रसोइया पिछले 29 दिसंबर 2025 से आंदोलन कर रही हैं। रसोइयों की मांग है कि उन्हें न्यूनतम मानदेय दिया जाए, सेवा को स्थायी किया जाए और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले। बड़ी संख्या में महिलाएं रायपुर के तूता धरना स्थल पर डटी हुई हैं।
राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप तेज–
दो महिलाओं की मौत के बाद विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि न्यूनतम मानदेय और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रही रसोइयों की आवाज को भाजपा सरकार लगातार नजरअंदाज कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी उदासीनता के कारण महिलाओं की जान गई है। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय ने बयान जारी कर कहा है कि दोनों मौतों का धरना स्थल या हड़ताल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। विभाग का कहना है कि महिलाओं की मृत्यु अन्य चिकित्सकीय कारणों से हुई है।
रसोइया संघ का मुआवजे की मांग–
रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामराज कश्यप ने कहा कि दोनों महिलाओं की तबीयत धरना स्थल पर बिगड़ी थी। उन्होंने सरकार से मृतक रसोइयों के परिजनों को मुआवजा देने और रसोइयों की लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस पहल नहीं की, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।