अभनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत रायपुर प्रवास पर हैं। इस दौरान वे अभनपुर के सौंनपैरी में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए। सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने समाज, परिवार और राष्ट्र से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार रखते हुए पांच प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकटों पर केवल चर्चा से समाधान संभव नहीं है, बल्कि ठोस उपायों पर गंभीर मंथन और उन्हें व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। उपाय हमारे पास ही हैं, जरूरत है उन्हें अपनाने की। मोहन भागवत ने समाज में एकता पर बल देते हुए कहा कि जाति, पंथ और भाषा के भेदभाव को समाप्त करना होगा। सभी को अपना मानकर व्यवहार करें। पूरा हिंदू समाज एक है और प्रत्येक व्यक्ति में राम विराजमान हैं। सभी व्यवस्थाएं सभी हिंदुओं के लिए समान रूप से खुली होनी चाहिए।
परिवार और सामाजिक संवाद पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अकेलापन व्यक्ति को नशे जैसी बुराइयों की ओर ले जाता है। इससे बचने के लिए संवाद जरूरी है। सप्ताह में एक दिन पूरा परिवार साथ बैठे, भजन करे, मां के हाथ का बना भोजन करे और आपसी चर्चा करे। आदेश की बजाय संवाद से सहमति बनाकर पारिवारिक निर्णय लें।
उन्होंने कहा कि हम अपने और परिवार के लिए समय व धन खर्च करते हैं, लेकिन देश के लिए कितना करते हैं, इस पर आत्ममंथन जरूरी है। देश सुरक्षित रहेगा तभी परिवार सुरक्षित रहेगा। हिंदुत्व की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले हमारे आदर्श हैं। कुटुंब प्रबोधन और मंगल संवाद पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण पर चिंता जताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और ऋतु चक्र में बदलाव गंभीर चुनौती है। जल संरक्षण, पेड़ लगाने, सिंगल यूज प्लास्टिक छोड़ने और घर के आसपास हरियाली बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने नागरिकों से अपने घर में मातृभाषा के प्रयोग, पारंपरिक वेशभूषा अपनाने और जिस राज्य में रहें, वहां की भाषा सीखने की अपील की। साथ ही नियमों, कानूनों और संविधान का पालन करने का संदेश दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव, वरिष्ठ भाजपा नेता धरमलाल कौशिक सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।