कांग्रेस में ‘व्हाट्सएप वॉर’! सरगुजा महाराज ग्रुप से भूपेश समर्थकों की सफाई, गुटबाजी फिर बेनकाब

रायपुर/अंबिकापुर, 4 जनवरी 2026। अंबिकापुर में कांग्रेस संगठन के भीतर कथित गुटबाजी एक बार फिर सामने आई है। इस बार विवाद सरगुजा महाराज से जुड़े कांग्रेस के एक व्हाट्सएप ग्रुप को लेकर खड़ा हुआ है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े समर्थकों को ग्रुप से हटाए जाने के आरोप लगे हैं। इस घटनाक्रम के बाद सरगुजा संभाग की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार “सरगुजा महाराज कांग्रेस व्हाट्सएप ग्रुप” में हाल के दिनों में विचारधारात्मक टकराव देखने को मिला। सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट्स में यह दावा किया गया कि ग्रुप को केवल टी.एस. सिंहदेव समर्थित मंच बताते हुए भूपेश बघेल विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं से ग्रुप छोड़ने को कहा गया। आरोप है कि ऐसा नहीं करने पर उन्हें ग्रुप से रिमूव कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि भूपेश बघेल के हालिया अंबिकापुर दौरे के दौरान उनके स्वागत में शामिल करीब एक दर्जन कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ग्रुप से हटा दिया गया। ग्रुप में की गई कुछ कथित टिप्पणियों ने विवाद को और हवा दी, जिससे कांग्रेस की अंदरुनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व उप मुख्यमंत्री और सरगुजा महाराज टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि वे विचारों के आदान-प्रदान के पक्षधर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतभेद स्वस्थ चर्चा तक सीमित होने चाहिए, लेकिन यदि कोई सदस्य आपत्तिजनक टिप्पणी करता है तो उस पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है। सिंहदेव ने यह भी बताया कि उन्हें स्वयं इस ग्रुप में एडमिन होने की जानकारी हाल ही में मिली।

वहीं कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने गुटबाजी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कुछ विघ्नसंतोषी तत्वों की हरकत है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है और इस तरह की गतिविधियों को पार्टी की आधिकारिक सोच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने सरगुजा संभाग की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया और व्हाट्सएप जैसे मंच अब राजनीतिक गतिविधियों का अहम माध्यम बन चुके हैं, जहां छोटी-सी घटना भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। फिलहाल, शीर्ष नेताओं के बयानों के बाद मामले को शांत करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इस विवाद ने कांग्रेस की अंदरुनी एकता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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