दुर्ग/ शहर की हवाओं में मातम घुल गया है। एक मासूम बच्ची, जो विश्वास और भोलेपन के साथ कन्या भोज के लिए घर से निकली थी, अब इस दुनिया में नहीं रही। उसका शव एक कार की डिग्गी से बरामद हुआ — एक दृश्य जिसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख दिया है।
यह सिर्फ एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था पर करारा तमाचा है। सवाल यह है कि जब हमारे समाज में एक छह साल की बच्ची भी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक किस भरोसे जिये ?
यह मर्मांतक घटना 20 साल पुराने पूजा हत्याकांड की भयावह याद दिलाती है, जब भिलाई में भी एक मासूम इसी तरह दरिंदगी का शिकार बनी थी। दो दशक बीत गए, लेकिन हालात जस के तस हैं। सिर्फ वादे बदले हैं, सिस्टम की नाकामी वही है।
शहरवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। जगह-जगह प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। पीड़िता को न्याय दिलाने और दोषियों को फांसी देने की मांग जोर पकड़ रही है।
आज पूरा दुर्ग पूछ रहा है —
आखिर कब जागेगा सिस्टम?
कब तक मासूमों की चीत्कारें दबाई जाती रहेंगी? कब मिलेगा इंसाफ, और कब होगी असली जवाबदेही तय?
अब वक्त है सिर्फ जवाब का नहीं, बल्कि सख्त एक्शन का। वरना, हर चुप्पी, हर देरी — एक और मासूम की जान की कीमत बन जाएगी !
टूटे हुए स्वर में माँ का दर्द-
सुबह 8:30 बजे मेरी 6 साल की बच्ची को मैनें अच्छी तरह से तैयार करके उसे दादी के घर भेजा. यहां नौ कन्या भोज था. साढ़े 10 बजे तक वह खूब खेली. इसके बाद अचानक गायब हो गई. हमने खूब तलाशा लेकिन नहीं मिली. पुलिस को सूचना दी. सभी ने उसे बहुत ढूंढा. देर शाम को एक युवक ने बताया कि बच्ची का शव कार में है. जब हमने देखा तो मेरी बच्ची के चेहरे, गले पर नोंचने के निशान थे. उसके शरीर पर जख्म थे. जलने के निशान थे.. उसे बुरी तरह नोंचा गया है. मेरी 6 साल की मासूम बच्ची ने किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा था. वो तो कन्या भोज के लिए आई थी. आरोपी को फांसी की सजा दो…”