छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र संपन्न, 4 दिनों में 35 घंटे 33 मिनट चर्चा; वंदे मातरम पर साढ़े पांच घंटे का ऐतिहासिक विमर्श

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र बुधवार को संपन्न हो गया। सदन की कार्यवाही समाप्त होते ही विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। चार दिवसीय इस सत्र के दौरान कुल 35 घंटे 33 मिनट तक विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई, जिसे लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सत्र की विशेष उपलब्धि राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हुई लगभग साढ़े पांच घंटे लंबी एवं गंभीर चर्चा रही। इस चर्चा में राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक चेतना, स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़े विषयों पर विस्तृत विमर्श किया गया।

सत्र के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि इस दौरान “विकसित छत्तीसगढ़ 2047” जैसे दूरदर्शी विषय पर विचार-विमर्श हुआ, जो राज्य के भविष्य की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम पर हुई चर्चा को अत्यंत सार्थक बताते हुए कहा कि इससे राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री ने विचारों की विविधता के बावजूद सकारात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण चर्चा के लिए सदन में उपस्थित सभी विधायकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सुंदरता संवाद और विमर्श में निहित है, जिससे सार्थक निष्कर्ष निकलते हैं। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 18 दिसंबर को पड़ने वाली बाबा गुरु घासीदास जयंती का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास के सामाजिक समरसता, समानता और मानवता के संदेश को स्मरण करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर विशेष चर्चा के लिए सदन का आभार जताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया कि संसद में इस विषय पर चर्चा कर राष्ट्रव्यापी विमर्श को गति दी गई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की गौरवगाथा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास साक्षी है कि अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने “वंदे मातरम” का उद्घोष करते हुए हंसते-हंसते बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमें अपने इतिहास से जोड़ता है और सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त करता है।

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